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ब्रह्म पुराण

ब्रह्मपुराणम्

सृष्टि, तीर्थ और देवताओं का महान् ग्रंथ

पढ़ने का समय

18 मिनट

श्लोक/आयत

18000

अध्याय/भाग

5

काल अनुमान

ईसा सन् 600-700

लेखक

महर्षि व्यास

स्रोत

महापुराण

परिचय

ब्रह्म पुराण ब्रह्मा जी को समर्पित है जो ब्रह्मांड के निर्माता हैं। इसमें 18,000 श्लोक हैं और 5 भागों में विभाजित है। यह पुराण सृष्टि की रचना प्रक्रिया, तीर्थ स्थलों का विस्तृत वर्णन, देवताओं की कथाएं और ब्रह्मांड विज्ञान के बारे में विस्तार से बताता है। ब्रह्म पुराण तीर्थ यात्रा के महत्व को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
पुराणब्रह्मसृष्टितीर्थसंस्कृत

📖 परिचय — ब्रह्म पुराण

ब्रह्म पुराण को परंपरा में प्रायः अठारह महापुराणों की सूची में प्रथम स्थान पर रखा जाता है, इसीलिए इसे 'आदि-पुराण' भी कहा जाता है। इसका केंद्रीय स्वर तीर्थ-माहात्म्य है — विशेषतः पुरुषोत्तम क्षेत्र (उड़ीसा का जगन्नाथ-क्षेत्र) से जुड़े तीर्थों, मंदिरों और उनकी कथाओं का विस्तृत वर्णन इसमें मिलता है, साथ ही गोदावरी नदी और उसके तटवर्ती तीर्थों की महिमा भी वर्णित है। इसमें सृष्टि-वर्णन, सूर्यवंश-चंद्रवंश की वंशावलियाँ और धर्म-आचार से जुड़ी शिक्षाएँ भी सम्मिलित हैं, जो इसे अन्य पुराणों की भाँति पंचलक्षण-ढाँचे से जोड़ती हैं, यद्यपि इसका बल तीर्थ-वर्णन पर विशेष रूप से केंद्रित है। परंपरा में इसे ब्रह्मा जी द्वारा कथित माना जाता है, इसी कारण इसका नाम 'ब्रह्म पुराण' पड़ा। अन्य महापुराणों की भाँति इसकी सामग्री भी अनेक शताब्दियों में विकसित हुई मानी जाती है, और इसके विभिन्न संस्करणों में अंतर भी मिलता है। नए पाठकों के लिए यह पुराण भारत के प्राचीन तीर्थ-भूगोल और मंदिर-परंपरा को समझने की एक उपयोगी खिड़की है।

🔑 मुख्य बातें

  • ब्रह्म पुराण को अठारह महापुराणों की सूची में प्रायः प्रथम रखा जाता है, इसीलिए इसे "आदि-पुराण" भी कहा जाता है।
  • इसका केंद्रीय विषय तीर्थ-माहात्म्य है, विशेषतः पुरुषोत्तम क्षेत्र (जगन्नाथ-क्षेत्र) और गोदावरी-तट के तीर्थ।
  • सृष्टि-वर्णन और सूर्यवंश-चंद्रवंश की वंशावलियाँ भी इसमें सम्मिलित हैं।
  • परंपरा में इसे ब्रह्मा जी द्वारा कथित माना जाता है, जिससे इसका नाम पड़ा।
  • अन्य महापुराणों की भाँति इसकी सामग्री भी अनेक शताब्दियों में विकसित हुई मानी जाती है।

📚 ब्रह्म पुराण का विस्तृत अध्ययन-पृष्ठ और मूल ग्रंथ-खंड देखें।

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प्रश्नोत्तर

ब्रह्म पुराण को "आदि-पुराण" क्यों कहा जाता है?

परंपरा में अठारह महापुराणों की सूची में इसे प्रायः प्रथम स्थान पर रखा जाता है, इसीलिए यह नाम प्रचलित हुआ।

ब्रह्म पुराण का मुख्य विषय क्या है?

इसका सबसे बड़ा भाग तीर्थ-माहात्म्य पर केंद्रित है, विशेषतः पुरुषोत्तम क्षेत्र (उड़ीसा) और गोदावरी-तट के तीर्थों का विस्तृत वर्णन।

क्या ब्रह्म पुराण का एक ही स्थिर पाठ उपलब्ध है?

अन्य महापुराणों की तरह इसके भी विभिन्न संस्करणों में अंतर मिलता है; यह पुराण-साहित्य की सामान्य विशेषता मानी जाती है।

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