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मार्कण्डेय पुराण

मार्कण्डेयपुराणम्

देवी माहात्म्य और देवी शक्ति का महान् ग्रंथ

पढ़ने का समय

16 मिनट

श्लोक/आयत

9000

अध्याय/भाग

137

काल अनुमान

ईसा सन् 600-800

लेखक

महर्षि मार्कण्डेय (द्रष्टा: ऋषि मैत्रेय)

स्रोत

महापुराण

परिचय

मार्कण्डेय पुराण देवी की शक्ति और महिमा को समर्पित है। इसमें 9,000 श्लोक हैं और 137 अध्यायों में विभाजित है। यह पुराण महर्षि मैत्रेय द्वारा महर्षि मार्कण्डेय को बताई गई कथाओं का संग्रह है। इस पुराण का सबसे महत्वपूर्ण अंश "देवी माहात्म्य" है जिसे "दुर्गा सप्तशती" भी कहते हैं। यह ग्रंथ नवरात्रि के दौरान सबसे अधिक पढ़ा जाता है।
पुराणदेवीशक्तिनवरात्रिसंस्कृत

📖 परिचय — मार्कण्डेय पुराण

मार्कण्डेय पुराण की सबसे प्रसिद्ध पहचान है इसका एक अंश — देवी-माहात्म्य (जिसे दुर्गा सप्तशती भी कहा जाता है) — जो स्वयं में इतना लोकप्रिय हुआ कि आज इसे प्रायः स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में भी पढ़ा-पूजा जाता है, विशेषतः नवरात्रि के अवसर पर। मार्कण्डेय पुराण की कथा-संरचना ऋषि मार्कण्डेय और उनके शिष्य क्रोष्टुकि के बीच के संवाद तथा जैमिनि के प्रश्नों पर आधारित है, जो महाभारत की कुछ जिज्ञासाओं (जैसे कुछ पात्रों की विचित्र नियति) को स्पष्ट करने से जुड़ी हैं। देवी-माहात्म्य के अतिरिक्त इस पुराण में सूर्यवंश और चंद्रवंश की वंशावलियाँ, विभिन्न व्रत-कथाएँ, तथा हरिश्चंद्र जैसे प्रसिद्ध चरित्रों की गाथाएँ भी मिलती हैं। यह पुराण दिखाता है कि किस तरह एक बड़े ग्रंथ का कोई अंश समय के साथ अपनी स्वतंत्र पहचान और लोकप्रियता बना सकता है, बिना मूल ग्रंथ से अपना संबंध खोए।

🔑 मुख्य बातें

  • मार्कण्डेय पुराण की सबसे प्रसिद्ध देन देवी-माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) है, जो इसी पुराण का अंश है।
  • इसकी संरचना ऋषि मार्कण्डेय, शिष्य क्रोष्टुकि और जैमिनि के प्रश्नों पर आधारित संवाद-शैली में है।
  • देवी-माहात्म्य आज प्रायः नवरात्रि में स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में भी पढ़ा जाता है।
  • सूर्यवंश-चंद्रवंश की वंशावलियाँ और हरिश्चंद्र जैसी गाथाएँ भी इस पुराण में हैं।
  • यह पुराण दिखाता है कि किसी बड़े ग्रंथ का अंश समय के साथ अपनी स्वतंत्र पहचान बना सकता है।

📚 मार्कण्डेय पुराण का विस्तृत अध्ययन-पृष्ठ और मूल ग्रंथ-खंड देखें।

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प्रश्नोत्तर

देवी-माहात्म्य और मार्कण्डेय पुराण में क्या संबंध है?

देवी-माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) मार्कण्डेय पुराण का ही एक अंश है, यद्यपि यह इतना लोकप्रिय हुआ कि आज इसे प्रायः स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में भी पढ़ा जाता है।

मार्कण्डेय पुराण की कथा-शैली क्या है?

यह ऋषि मार्कण्डेय, उनके शिष्य क्रोष्टुकि और जैमिनि के प्रश्नों पर आधारित संवाद-शैली में रचा गया है।

क्या मार्कण्डेय पुराण में केवल देवी-कथाएँ हैं?

नहीं, इसमें देवी-माहात्म्य के अतिरिक्त सूर्यवंश-चंद्रवंश की वंशावलियाँ, व्रत-कथाएँ और हरिश्चंद्र जैसे चरित्रों की गाथाएँ भी हैं।

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