विष्णु पुराण
विष्णुपुराणम्
विष्णु के अवतार और ब्रह्मांड निर्माण का महान् ग्रंथ
पढ़ने का समय
22 मिनट
श्लोक/आयत
23000
अध्याय/भाग
6
काल अनुमान
ईसा सन् 400-500
लेखक
महर्षि पराशर
स्रोत
महापुराण
विष्णुपुराणम्
विष्णु के अवतार और ब्रह्मांड निर्माण का महान् ग्रंथ
पढ़ने का समय
22 मिनट
श्लोक/आयत
23000
अध्याय/भाग
6
काल अनुमान
ईसा सन् 400-500
लेखक
महर्षि पराशर
स्रोत
महापुराण
विष्णु पुराण को परंपरा में पंचलक्षण (सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वंतर, वंशानुचरित) का सबसे आदर्श और संतुलित उदाहरण माना जाता है — अन्य कई पुराणों में इनमें से कोई एक विषय प्रधान हो जाता है, जबकि विष्णु पुराण में पाँचों विषय अपेक्षाकृत सुसंगत रूप में मिलते हैं। इसकी संरचना ऋषि पराशर और उनके शिष्य मैत्रेय के बीच के संवाद पर आधारित है, जिसमें पराशर मैत्रेय के प्रश्नों के उत्तर में सृष्टि से लेकर राजवंशों के इतिहास तक का विवरण देते हैं। इसमें ध्रुव, प्रह्लाद जैसे प्रसिद्ध भक्तों की कथाएँ हैं, जो भक्ति और धैर्य की शिक्षा देती हैं। विष्णु पुराण की भाषा-शैली अपेक्षाकृत सुव्यवस्थित और संक्षिप्त मानी जाती है, जिससे यह अध्ययन के लिए सुगम बनता है। यह वैष्णव परंपरा के प्रमुख ग्रंथों में गिना जाता है, यद्यपि इसकी दार्शनिक दृष्टि व्यापक है और विशिष्ट सांप्रदायिक सीमाओं से परे भी पढ़ी जाती रही है। नए पाठकों के लिए पंचलक्षण-ढाँचे को समझने का यह सबसे उपयुक्त पुराण माना जाता है।
📚 विष्णु पुराण का विस्तृत अध्ययन-पृष्ठ और मूल ग्रंथ-खंड देखें।
विस्तार से पढ़ें →क्योंकि इसमें सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वंतर और वंशानुचरित — पाँचों पारंपरिक विषय अपेक्षाकृत संतुलित और सुसंगत रूप में मिलते हैं, जो अन्य कई पुराणों में समान अनुपात में नहीं मिलता।
यह विष्णु पुराण की मूल संरचना है — ऋषि पराशर अपने शिष्य मैत्रेय के प्रश्नों के उत्तर में सृष्टि से लेकर राजवंशों के इतिहास तक का ज्ञान देते हैं।
यह वैष्णव परंपरा का प्रमुख ग्रंथ अवश्य है, पर इसकी पंचलक्षण-संरचना और दार्शनिक सामग्री इसे व्यापक अध्ययन-रुचि का विषय बनाती है।